Service is Devotion

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The existence of Lord Shiva "Aghor" is believed to be there even before creation of life in universe. Aghor is an ancient spritual discipline and has been practised ever since the early days of Vedic Era. Words like "Aghor", "Aughad", "Kapalik", "Aghori", "Aughar", "Awadhoot" means the same, which is simple and natural state of consciousness.

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बाबा कीनाराम जन्मोत्सव समारोह -2026

Event Date

10 September 2026

बाबा कीनाराम जन्मोत्सव समारोह -2026

'बाबा कीनाराम जन्मोत्सव समारोह -2026' के दौरान महाराजश्री की जन्मस्थली, पावन रामगढ़ की धरती, सराबोर रही श्रद्धालुओं की आस्था से

वाराणसी जिले की एक तहसील हुआ करती थी- चंदौली । मग़र अब ये स्थान जिले के रुप में दर्ज़ है - चंदौली जिला । उत्तर प्रदेश -बिहार को जोड़ता ये जिला मूलतः एक कृषि-प्रधान क्षेत्र है, लेकिन इसकी एक चरम अध्यात्मिक दास्ताँ इस जिले को राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में ले जाती है ।

जी हाँ ! ये जिला और इस जिले के रामगढ़ नामक स्थान का एक पता, 'बाबा कीनाराम मठ', रामशाला-रामगढ़, जिला चंदौली, वो पता है जो आध्यात्मिक क्षेत्र की दिग्गज विभूतियों को यहाँ खींच लाता है ।
धर्म-जाति-संप्रदाय-वर्ग से हटकर अभेद की अवस्था का एहसास कराता ये पावन स्थान, भगवान् शिव की सर्वोत्तम आध्यात्मिक अवस्था, अघोर परंपरा, के आराध्य-ईष्ट-अधिष्ठाता एवं सर्वमान्य आचार्य अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम जी का जन्म-स्थान है ।
1601 में जन्मे बाबा कीनाराम जी को, श्रद्धालुओं के बीच, भगवान् शिव का मानव तन माना जाता है । उन्हीं बाबा कीनाराम जी का 'तीन दिवसीय जन्मोत्सव समारोह', यहां के पीठाधीश्वर और वर्तमान में सम्पूर्ण अघोर परंपरा के आराध्य-ईष्ट-अधिष्ठाता एवं सर्वमान्य आचार्य, अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी की अध्यक्षता व् मार्गदर्शन में हर साल मनाया जाता है ।
वर्ष 2026 में 10-11 व 12 सितम्बर को आयोजित ये तीन दिवसीय जन्मोत्सव फ़िर से आस्था श्रद्धालुओं के जनसैलाब की गवाही देता नज़र आया ।
इस जन्मोत्सव की सबसे बड़ी ख़ासियत ये होती है कि आध्यात्मिक धरातल पर आधारित ये समारोह चंदौली का सबसे बड़ा समाजिक सरोकार वाला कार्यक्रम होता है । जनसैलाब ऐसा कि मानो पूरे साल भर, चंदौली जिले के, लोगों को इंतज़ार रहता है तीन दिवसीय ' बाबा कीनाराम जन्मोत्सव समारोह' का । समाज का हर वर्ग इस समारोह में शिरक़त करता है ।
अघोर के आचार्य के जन्मोत्सव कार्यक्रम का नज़ारा बे-मिसाल होता है । हर वर्ग आस्था-विश्वास और जोश से सराबोर होता है । दर्शन-पूजन, आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के आशीर्वचन को हर कोई लालायित दिखता है ।
एक तरफ़ समाज के विशिष्ट/गणमान्य वर्ग कहे जाने वाले प्रतिनिधि, बाबा के दरबार में, अपनी हाज़िरी लगाते हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ बौद्धिक वर्ग के लोग 'बाबा कीनाराम जी और अघोर परंपरा' के ऊपर अपने सारगर्भित विचारों को विभिन्न क्षेत्रों के कलाकार अपने फ़न का जादू बिखेर कर उपस्थित जनमानस की वाहवाही लूटते हैं ।
हर साल की तरह बार भी तीनों दिन भक्त समुदाय, बाबा को, अपना श्रद्धा-सुमन अर्पित करता रहा । विशिष्ट जन बाबा के दरबार में उपस्थित होकर अपने विश्वास और हर्षोल्लास को खुलकर प्रकट करते नज़र आए .... और... कलाकारों का तो क्या कहना --- जब नामचीन कलाकारों ने अपने हुनर को हज़ारों चाहने वालों के सामने पेश किया तो बस पूछिए मत .... तालियों की गूँज के ज़रिये शाबासी का दौर चलता ही रहा ।
वैचारिक गोष्ठी के तहत बौद्धिक वर्ग के लोग 'बाबा कीनाराम जी और अघोर परंपरा' के ऊपर अपने अनुभवों की साझेदारी करते दिखे ।
रहा सवाल इस अवसर पर लगने वाले मेला का तो 'बाबा कीनाराम जन्मोत्सव समारोह -2026' के दौरान लगने वाला मेला अब अपना दायरा बढ़ा रहा है। बाबा कीनाराम जी के दर्शन के बाद मेले का आकर्षण किसी को भी निराश नहीं करता । क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या जवान .... समाज का हर वर्ग विशाल मेला क्षेत्र का लुत्फ़ उठाता नज़र आया ।
जन्मोत्सव कार्यक्रम के आख़िरी दिन, 12 सितम्बर 2026 को यहां के पीठाधीश्वर और वर्तमान में सम्पूर्ण अघोर परंपरा के आराध्य-ईष्ट-अधिष्ठाता एवं सर्वमान्य आचार्य, अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के आशीर्वचन के साथ इस जन्मोत्सव कार्यक्रम का समापन हुआ।
13 सितंबर को मेले में आए सभी संप्रदाय के साधुजनों को भोजन ग्रहण कराकर, अंगवस्त्रम एवं दक्षिणा देकर उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी गयी।